हर शाख पे उल्लू बैठा है..स्कूली बच्चों के पोषण आहार में करप्शन

Update: 2021-03-02 15:13 GMT

-मोसीन शेख-

मुंबई। हर शाख पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा! यह पंक्ति यहां बिल्कुल सटीक बैठती है। हैरत की बात है कि स्कूली बच्चों के पोषण आहार में करप्शन साफ-साफ दिखाई दे रही है। जितना आहार भेजना चाहिए, उतना नहीं पहुंच रहा है। आखिर कब खत्म होगा करप्शन?


सरकार स्कूली बच्चों को पोषण प्रदान करने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूल पोषण योजना चला रही है। पहली से 8 वीं कक्षा के लिए 5 किलो 400 ग्राम चावल, 1.5 किलोग्राम मसूर दाल और 2 किलो ग्राम मूंग दाल की खिचड़ी दी जाती है। छठी से आठवीं कक्षा के छात्रों को भी साढ़े आठ किलोग्राम चावल, डेढ़ किलोग्राम दाल और तीन किलोग्राम चना दाल मिलाकर पौष्टिक भोजन दिया जाता है। पर वास्तव में यह पौष्टिक भोजन छात्रों तक नहीं पहुंचता है, क्योंकि सरकार द्वारा प्रदान किए गए भोजन पर ठेकेदार कटौती कर रहे है।


 उस्मानाबाद जिले के भटशिरपुरा और देवधनोरा स्कूलों में एक उदाहरण सामने आया है कि भोजन की आपूर्ति कम की जा रही है, सभी शिक्षकों ने इसका पोलखोल किया है। ठेकेदारों की ओर से 50 किलो की बोरी में केवल 35 किलो चावल भेजा जाता है, वहीं दाल और चने की बोरी में भी कम वजन होता है। इसकी शिकायत प्रधानाध्यापक बालकृष्ण भबारे ने दर्ज की है।

इसके बावजूद प्रशासन इस बारे में गंभीर नहीं दिख रहा है। अनाज की जांच करना हेडमास्टर की जिम्मेदारी है। जिला परिषद के मुख्याधिकारी विजय कुमार फड ने कहा कि यदि पोषण आहार में भ्रष्टाचार हो रहा है, तो उन्हें गिना जाना चाहिए और जिला परिषद के पास शिकायत दर्ज की जानी चाहिए। दोषियों पर एक्शन होगा। इस तरह का सरकारी उत्तर दिया है।


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