TRP Scam: BARC के पूर्व CEO पार्थो दासगुप्ता को मिली जमानत

Update: 2021-03-02 10:51 GMT

फाइल photo

मुंबई। TRP स्कैम में आरोपी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल के पूर्व सीईओ पार्थ दासगुप्ता राहत मिली है। टीआरपी स्कैम मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पार्थ दासगुप्ता को जमानत दे दी है। दासगुप्ता को मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने बीते साल 24 दिसम्बर को कथित टीआरपी हेराफेरी मामले में गिरफ्तार किया था, तभी से वह जेल में हैं। BARC के पूर्व सीईओ पार्थ दासगुप्ता को 2 लाख रुपए के बेल बॉन्ड पर जमानत दी गई है।

उन्हें अपना पासपोर्ट अदालत के समक्ष जमा करना होगा और हर महीने 6 महीने की अवधि के लिए अपराध शाखा के समक्ष उपस्थित होना होगा। इससे पहले जनवरी महीने में पार्थ दासगुप्ता की बेल याचिका को मुंबई की स्थानीय अदालत ने ठुकरा दिया था, जिसके बाद उऩ्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान मुंबई की एक कोर्ट ने उस वक्त कहा था कि उन्होंने घोटाले में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। मुंबई पुलिस ने अदालत को बताया था कि रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी ने समाचार चैनल के दर्शकों की संख्या बढ़ाने के लिए दासगुप्ता को 'लाखों रुपये की कथित तौर पर रिश्वत दी थी।

क्या है TRP?

TRP यानी टेलीविजन रेटिंग पॉइंट। यह किसी भी टीवी प्रोग्राम की लोकप्रियता और ऑडियंस का नंबर पता करने का तरीका है। किसी शो को कितने लोगों ने देखा, यह TRP से पता चलता है। यदि किसी शो की TRP ज्यादा है तो इसका मतलब है कि लोग उस चैनल या उस शो को पसंद कर रहे हैं। एडवर्टाइजर्स को टीआरपी से पता चलता है कि किस शो में एडवर्टाइज करना फायदेमंद रहेगा। TRP से ही पता चलता है कि किस चैनल को कितने लोग देख रहे हैं। किस शो की लोकप्रियता ज्यादा है। इसी आधार पर वे अपना प्रमोशनल प्लान तैयार करते हैं और एडवर्टाइजमेंट देते हैं।

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