यूपी में भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा सभी के प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी, कारण क्या है?

Update: 2020-11-24 11:09 GMT

UP का विधानसभा चुनाव 2022 में है, पर सभी दलों की नजर ओबीसी समुदाय के वोट बैंक पर है, सत्तापक्ष से लेकर विपक्ष तक अपनी-अपनी पार्टी की कमान यूपी में पिछड़े समुदाय के हाथों में दे रखी है. उत्तर प्रदेश का ओबीसी समुदाय किस पार्टी पर भरोसा जताता है. ओबीसी का तकरीबन 50 फीसदी ये वोट बैंक जिस भी पार्टी के खाते में गया, सत्ता उसी की हुई है। यूपी भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह कुर्मी जाति से आते हैं, इसी जाति के नरेश उत्तम भी हैं, जो सपा प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाल रहे है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू सैंथवार अति पिछड़ी जाति से आते हैं। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर अति पिछड़े समुदाय के राजभर समाज से आते हैं।

उत्तर प्रदेश में सरकारी तौर पर जातीय आधार पर पिछड़ा वोट बैंक का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, मगर एक अनुमान के तहत यूपी में सबसे बड़ा वोट बैंक पिछड़ा वर्ग का है. लगभग 51 फीसदी पिछड़ा वोट बैंक में 43 फीसदी वोट बैंक गैर यादव बिरादरी का है, जो कभी किसी पार्टी के साथ स्थाई रूप से नहीं खड़ा रहता है. पिछड़ा वर्ग के वोटर कभी सामूहिक तौर पर किसी पार्टी के पक्ष में भी वोटिंग नहीं करते हैं. उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब बात पिछड़े वर्ग की आती है तो यादव को छोड़कर अन्य पिछड़ी जातियों की सियासत काफी अलग खड़ी नजर आती है. यादव वोटर लंबे समय से ठीक वैसे ही सपा के साथ जुड़े हुए हैं जैसे दलित बसपा का दामन थामे हैं. इसीलिए अखिलेश यादव ने अपने पंरापरागत 9 फीसदी यादव वोट बैंक के साथ पिछड़े समुदाय के आने वाले दूसरी सबसे बड़ी आबादी कुर्मी को साधने के लिए नरेश उत्तम को सूबे में पार्टी की कमान दे रखी है.

गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक की बात करें तो दूसरे नंबर पर पटेल और कुर्मी वोट बैंक आता है. भाजपा ने कुर्मी समुदाय से ही स्वतंत्र देव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बना रखा है तो कुशवाहा समाज के लिए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से लेकर स्वामी प्रसाद मोर्य तक भाजपा के साथ खड़े हैं. यूपी में कुर्मी और मौर्या समाज करीब 13 फीसदी हैं. जातिगत आधार पर देखें तो यूपी के सोलह जिलों में कुर्मी और पटेल वोट बैंक छह से 12 फीसदी तक है. ओबीसी में एक और बड़ा वोट बैंक लोध जाति का है, जो बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है.इनके अलावा ओबीसी वोट बैंक में करीब डेढ़ सौ और जातियां हैं, जिन्हें अति पिछड़ों की श्रेणी में रखा जाता है. इन्हें साधने की कवायद में कांग्रेस लगी हुई है. कांग्रेस ने इसीलिए अति पिछ़ड़ा समुदाय से आने वाले अजय कुमार लल्लू को पार्टी की कमान सौंप रखी है, जिनका पूरा जोर अति पिछड़ा वोटों को कांग्रेस के पाले में लाने का है. अब देखना यह होगा कि ओबीसी समाज अबकी बार किस तरफ जाता है।

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