क्षेत्रीय दलों को दबाने राजस्थान में भाजपा-कांग्रेस ने मिलाया हाथ,क्यों दुखी हैं दोनों नेता?

Update: 2020-12-11 13:04 GMT

जयपुर। राजस्थान में कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं ने पंचायत समिति और जिला परिषद प्रमुखों के चुनाव में क्षेत्रीय दलों को दूर रखने के लिए हाथ मिला लिया है। डूंगरपुर जिला परिषद चुनाव में भारतीय ट्राइबल पार्टी के उम्मीदवार को हराने के लिए कांग्रेस ने निर्दलीय के रूप में नामांकन कराने वाले बीजेपी नेता का समर्थन कर दिया। बीटीपी ने प्रदेश में राजनीतिक संकट और राज्यसभा चुनाव के दौरान गहलोत सरकार का साथ दिया था। डूंगरपुर जिला परषिद की कुल 27 सीटों में से 13 पर बीटीपी का समर्थन प्राप्त उम्मीदवार जीते हैं, जबकि बीजेपी को 8 और कांग्रेस को छह सीटें मिली हैं। कांग्रेस और बीजेपी ने सूर्य अहारी का समर्थन किया और वह जिला प्रमुख चुने गए। इसी तरह नागौर जिले में खिनवसर पंचायत समिति चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी ने साथ आकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के उम्मीदवार को हरा दिया। आरएलपी बीजेपी की सहयोगी पार्टी है।

बीजेपी और कांग्रेस ने यहां हाथ मिलाकर एक निर्दलीय उम्मीदवार को जिला परिषद का प्रमुख बना दिया। आरएलपी को यहां 31 में से 15 सीटें मिली थीं, कांग्रेस को 8, बीजेपी के पांच और 3 निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे। 16 वोटों के साथ सीमा चौधरी ने यहां जीत हासिल की। चुनाव में धोखे से आहत बीटीपी प्रमुख छोटूबाई वासवा ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी कांग्रेस से अपना समर्थन वापस लेगी। उन्होंने ट्वीट किया, ''बीजेपी-कांग्रेस एक ही है। बीटीपी अपना समर्थन वापस लेगी। आरएलपी चीफ और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा है कि कांग्रेस और बीजेपी के अपवित्र गठबंधन को देखने के बाद उनकी पार्टी बीजेपी के साथ रिश्ते पर विचार कर रही है। हनुमान बेनीवाल ने कहा, ''आरएलपी से डरकर दोनों पार्टियां एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन में आ गईं। हमारे उम्मीदवार नौ जिला परिषदों में जीते। हमने कभी कोई समझौता नहीं किया, लेकिन हमें हराने के लिए कांग्रेस और बीजेपी साथ आ गईं। हम बीजेपी के साथ अपने गठबंधन पर दोबारा विचार करेंगे। 

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