बालासाहेब ठाकरे के नाम पर मराठवाड़ा में​ ​होगा बड़ा प्रोजेक्ट

Update: 2022-09-16 06:44 GMT

स्पेशल डेस्क, मैक्स महाराष्ट्र, मुंबई:​ ​राज्य सरकार ने अब हल्दी अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र, अनुसंधान और प्रसंस्करण नीति के कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी है, जिसकी मांग कई वर्षों से की जा रही है। इस तरह के आदेश अब राज्य के कृषि विभाग की ओर से जारी किए गए हैं। कृषि मंत्री अब्दुल सत्तार ने बताया कि सरकार ने इन दोनों कार्यों के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई है​।​ कृषि मंत्री ने यह भी जानकारी दी है कि हिंगोली में हल्दी अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जाएगी और इस केंद्र का नाम बालासाहेब ठाकरे राज्य हल्दी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र ​किया जाएगा।


मराठवाड़ा में इस परियोजना को स्थापित करने का कारण बताते हुए कृषि मंत्री अब्दुल सत्तार ने बताया कि भारत दुनिया में हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। भारत में मसालों और उप-मसाला फसलों के तहत कुल क्षेत्रफल के लगभग 6 प्रतिशत भाग पर हल्दी की खेती की जाती है। भारत में हल्दी की खेती के लिए भौगोलिक दृष्टि से अनुकूल वातावरण होने के कारण हल्दी की खेती पूरे भारत में की जा सकती है। भारत में हल्दी मुख्य रूप से महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश आदि में उगाई जाती है। राज्य में लिया। वर्ष 2019-20 में देश में हल्दी की फसल का रकबा 2.18 लाख हेक्टेयर था। जिसमें से 54885 हेक्टेयर क्षेत्र महाराष्ट्र में था। वर्ष 2021-22 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में हल्दी की फसल के अंतर्गत कुल 1.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है। राज्य में हल्दी का क्षेत्र मुख्य रूप से मराठवाड़ा में सबसे अधिक है। राज्य में हल्दी की फसल के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में से, मराठवाड़ा में हल्दी की फसल के तहत कुल 82009 हेक्टेयर (80%) क्षेत्र है।




 


कृषि मंत्री ने ​यह ​भी दी जानकारी​ कि​ लेकिन पिछले कई सालों से प्रदेश के हल्दी किसानों को प्राकृतिक आपदा, पानी की कमी, हल्दी में मिलावट जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था​।​ इन सभी समस्याओं के समाधान, अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र की मांग कई वर्षों से की जा रही है। इस प्रस्ताव पर 2022 के पिछले मानसून सत्र में भी चर्चा हुई थी। इस प्रस्ताव पर विचार करने के बाद राज्य सरकार ने हल्दी अनुसंधान एवं प्रसंस्करण नीति को लागू करने तथा हिंगोली में बालासाहेब ठाकरे राज्य हल्दी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना को मंजूरी दे दी है और यह केंद्र धारा 8 के अनुसार अलाभकारी आधार पर स्थापित किया जाएगा​।​


इस केंद्र के लिए 100 करोड़ का फंड मंजूर किया गया है, सरकार ने 100 करोड़ का फंड उपलब्ध कराया है. जिसमें से चालू वर्ष में इस परियोजना के लिए 10 करोड़ की धनराशि दी जाएगी। अब्दुल सत्तार ने यह भी बताया कि शेष धनराशि का वितरण अगले वित्तीय वर्ष में चरणों में किया जाएगा। बालासाहेब ठाकरे हल्दी अनुसंधान और प्रसंस्करण केंद्र इस केंद्र का उद्देश्य कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण आय प्रदान करना, लागत प्रभावी तकनीक, हल्दी की खेती के आदर्श तरीकों का निर्माण, किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं, निर्यातकों की विभिन्न समस्याओं का समाधान, किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करना, प्रदान करना है।

कृषि मंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि ​इससे वित्तीय स्थिरता​ दूर​​ ​होने जा र​ही​​ हैं। इसके अलावा, इस नीति की अवधि 2022 से 2027 तक होगी। बेशक, यह पॉलिसी पांच साल के लिए होगी। इस नीति में हल्दी उत्पादकों, प्रसंस्करणकर्ताओं और निर्यातकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस नीति की अवधि जरूरत के हिसाब से बढ़ाई जाएगी।

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