मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सत्ता के लिए किया था उद्धव के खिलाफ विद्रोह ,ना की हिंदुत्व

Chief Minister Eknath Shinde had rebelled against Uddhav for power, not Hindutva.

Update: 2024-01-07 12:56 GMT

महाराष्ट्र देश का आर्थिक राज्य होने के कारण देश की बड़ी कंपनियों का हेड ऑफिस मुंबई में है, जहा देश भर से लोग काम के लिए आते है , अकेले बीएमसी का सालाना बजट 40 हज़ार करोड़ का है,और जिस राज्य में इतनी अटूट संपत्ति हो, तो उस राज्य को पाने के लिए नेताओ में होड़ लगेगी ही , इसीलिए महाराष्ट्र की अहमियत राजनितिक तौर पर ओर बढ़ जाती है। राज्य में राजनितिक घटनाओ का असर पुरे देश पर पड़ता है, क्योंकी उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा लोकसभा की सीटें महाराष्ट्र में ही है.

वही शिवसेना में टूट के बाद राज्य का राजनितिक पारा हाई है, कब कोन सी पार्टी में टूट हो जाए और कोन सा नेता किस दल में शामिल हो जाए यह कोई नहीं जानता ,वैसे शिवसेना में बगावत कर महाराष्ट्र के सीएम बने एकनाथ शिंदे ने हाल ही में एक बड़ा बयान दिया, जिसकी चर्चा इन दिनों खूप हो रही और बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है ,दरअसल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पुणे जिले के राजगुरु नगर में लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिए शिवसंकल्प रैली की शुरुवात करते हुए कहा, शुवसेना को बचाने के लिए उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह करना पड़ा ,आप को बतादे की मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ,जून 2022 में शिवसेना की दो फाड़ कर दी थी, और भाजपा के साथ मिल कर सरकार बनाई ,यह तो ऊपर की बाते है , जो पब्लिक डोमेन में , वही भाषण देते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना की इतिहास को याद करते हुए कहा की जब 1995 में, पहली बार शिवसेना ने भाजपा के साथ राज्य में सरकार बनाई थी , तब शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे अगर चाहते तो मुख्यमंत्री खुद बन सकते थे , लेकिन उन्होंने पार्टी कार्यकर्ता मनोहर जोशी को मुख्यमंत्री बनाया। वही उद्धव ठाकरे ने 2019 में भाजपा के साथ दशकों पुराना गठबंधन तोड़ कर मुख्यमंत्री खुद बन गए।

एकनाथ शिंदे के इस बयान से एक बात तो साफ हो गई की उद्धव ठाकरे से बगावत हिन्दुत्व के लिए नहीं, सत्ता के लिए की गई थी ,आप को बतादे की 2022 में एकनाथ शिंदे और विधायकों ने जब बगावत कर गुजरात और फिर असम गए थे, तब मीडिया में बयान दिया था, की शिवसेना की विचारधारा अलग है, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ सरकार में नहीं रह सकते।

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