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हिंदी पर हंगामा, कनोमोझी के बाद चिदंबरम और कुमारस्वामी भी कूदे

हिंदी पर हंगामा, कनोमोझी के बाद चिदंबरम और कुमारस्वामी भी कूदे
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चेन्नई/ दिल्ली। डीएमके सांसद कनिमोझी से कथित तौर पर भाषा के चलते हुई बदसलूकी का मामला आग की तरह फैल रहा है। अब कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भी कहा है कि हिंदी भाषा को लेकर उनसे भी भेदभाव किया गया। कुमारस्वामी ने लिखा कि हिंदी पॉलिटिक्स के चलते दक्षिण भारत के नेताओं से मौके छीने गए। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि हिंदी बोलने को लेकर वह कई सरकारी अधिकारियों और आम लोगों के भी तंज झेलते रहे हैं।

कनिमोझी की शिकायत के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने जांच के आदेश दिए हैं। भाषायी भेदभाव को लेकर एक बहस भी शुरू हो गई। इस बहस में कनिमोझी के समर्थन में कुमारस्वामी और चिदंबरम सरीखे नेताओं के उतरने से मामला चर्चा में है। एक लंबे समय से भाषा के आधार पर भेदभाव को लेकर अकसर विवाद होते रहे हैं। दक्षिण भारत के कई नेता अकसर हिंदी थोपने का भी आरोप लगाते रहे हैं। कुमारस्वामी ने लिखा, 'हिंदी पॉलिटिक्स के कारण ही स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा को हिंदी में भाषण देना पड़ा। कुमारस्वामी ने सिलसिलेवार कई ट्वीट्स में यह भी लिखा कि कनिमोझी के साथ हुई इस अपमानजनक घटना के खिलाफ वह अपनी आवाज उठाते हैं।

उन्होंने लिखा कि यह बहस का विषय है। पी चिदंबरम ने अपने ट्वीट में लिखा, 'चेन्नै एयरपोर्ट पर डीएमके सांसद कनिमोझी के साथ हुई यह घटना कोई नई बात नहीं है। मैंने खुद कई सरकारी अधिकारियों और आम लोगों के तंज सहे हैं। वे चाहते हैं कि फोन पर या कई बार आमने-सामने भी मैं हिंदी में ही बात करूं।' कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस पर कहा है कि यह बहुत निंदनीय है। अभी भाषा का टेस्ट हो रहा है? आगे क्या होगा? इस पर सीआईएसएफ को जवाब देना चाहिए।

Updated : 10 Aug 2020 1:17 PM GMT
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