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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है - महेश तपासे

देश के पूर्व न्यायाधीशों और वरिष्ठ वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है - महेश तपासे
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मुंबई: महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ( एनसीपी) के मुख्य प्रवक्ता महेश तपासे ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है। उन्होंने यह बयान सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा देश के मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए उस पत्र के आधार पर दिया है, जिसमे मुस्लिम प्रदर्शनकारियों पर सरकार की हालिया कार्रवाई के बाद यूपी प्रशासन के खिलाफ सुमोटो के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

पैगंबर मोहम्मद के बारे में भाजपा प्रवक्ता द्वारा दिए गए एक विवादास्पद बयान के बाद इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश में मुसलमानों ने विरोध प्रदर्शन किया है। जिसके बाद वहां की जा रही कार्रवाई और स्थिति को लेकर सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की है। महेश तपासे ने कहा कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश सरकार ने मुस्लिम प्रदर्शनकारियों के कानूनी घरों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।इसके बाद सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश पुलिस की बर्बरता से भरे कई पोस्ट देखने को मिल रहे हैं ।

महेश तपासे ने कहा कि इस तरह का जुल्म उस प्रदेश में हो रहा है, जहां श्री राम भगवान की जन्मस्थली है। लगता है खुद को योगी कहने वाले मुख्यमंत्री ने अपने ही प्रशासन द्वारा किए जा रहे अत्याचारों से आंखें मूंद ली हैं। महेश तपासे ने यह भी सवाल किया है कि क्या यह बीजेपी का राम राज्य है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार के इशारे पर नागरिकों के अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों और दलितों के प्रति भाजपा की असहिष्णुता जगजाहिर है और इसलिए डर है कि अन्य भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों को चुप कराने के लिए कठोर, दमनकारी और असंवैधानिक तरीकों का सहारा लिया जा सकता है।

महेश तपासे ने कहा कि भारतीय संविधान के प्रति सम्मान की कमी के कारण, भाजपा नेता राज्य में दमन को भड़काने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल कर रहे हैं। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर राज्य में मौलिक अधिकारों के घोर उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश प्रशासन के खिलाफ सुमोटो कार्रवाई की मांग की है। इस बीच, महेश तपासे ने सभी समुदाय के नागरिकों से इस तरह के कृत्यों का विरोध करने की अपील करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य में संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने की सलाह दी है।

Updated : 2022-06-16T17:56:01+05:30
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