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कपटी बाबाओं की अब खैर नहीं

कपटी बाबाओं की अब खैर नहीं
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बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
बलात्कार के आरोप में तीन साल से फरार चल रहा ढोंगी बाबा

बाबाओं के आश्रमों, डेरों, अखाड़ों और मठों में महिलाओं के खिलाफ आपराधिक गतिविधियों और उनके रहन-सहन के स्वच्छ समुचित इंतजाम ना होने से कोरोना संक्रमित होने की बढ़ती घटनाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा.देशभर में फर्जी बाबाओं के 17 आश्रम व अखाड़ों में महिलाओं के खिलाफ आपराधिक गतिविधियों के आरोपों और इन आश्रमों में रह रहीं महिलाओं के बीच कोरोना महामारी फैलने के खतरे को लेकर एक युवती के पिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को याचिका की कॉपी सॉलिसिटर जनरल को देने को कहा है.सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका तेलंगाना निवासी पिता ने दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि अब से ठीक पांच साल पहले 2015 में उनकी बेटी विदेश से उच्च शिक्षा (डॉक्टर) हासिल करके आई थी. इसके बाद दिल्ली में एक फर्जी बाबा विरेंद्र दीक्षित के चंगुल में फंस गई.बेटी पिछले 5 सालों से इसी बाबा के दिल्ली के रोहिणी इलाके में बने आश्रम आध्यात्मिक विद्यालय में रह रही है. ये बाबा बलात्कार के आरोप में तीन साल से फरार चल रहा है.याचिका में ये भी कहा गया है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने देशभर में 17 आश्रम व अखाड़े को फर्जी करार दिया है. इनमें से ज्यादातर अवैध रूप से बनाई गई भव्य इमारतों में चल रहे हैं. यहां रहने लायक बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं.इनमें लड़कियां और महिलाएं रह रही हैं. उनकी हालत जेल के कैदियों से भी बदतर है. कोरोना संकट काल में इन आश्रम और अखाड़े में कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है. इसलिए यहां रह रही लड़कियों और महिलाओं को इन आश्रम व अखाड़ों से सुरक्षित बाहर निकाला जाए.

Updated : 17 July 2020 11:18 PM GMT
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