Top
Home > न्यूज़ > धारावीकरों का हाल बेहाल, जिएं तो जिएं कैसे बेरोजगार हो गए?

धारावीकरों का हाल बेहाल, जिएं तो जिएं कैसे बेरोजगार हो गए?

धारावीकरों का हाल बेहाल, जिएं तो जिएं कैसे बेरोजगार हो गए?
X

तारिक खान

मुंबई। एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-बस्ती धारावी मुंबई के छोटे उद्योगों के ग्रोथ इंजन के तौर पर बनी है। कोविड-19 की भीषण मार से सफलता प्राप्त कर ली है, लेकिन अब धारावी के सामने लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था में अपने लाखों निवासियों के लिए छीन गयी आजीविका को दोबारा पटरी पर लाना एक बड़ा चैलेंज है। यहां पर चमड़ा, चरबी, कपडे, मिट्टी के बर्तन,आर्टिफिशियल ज्वेलरी, हैंड एंड मशीन एम्ब्रायडरी, गारमेंट्स आदि के छोटी-बड़ी हजारो कंपनियां और कारखाने हैं, जिससे लाखों परिवार अपना पेट भरता है।

यहां रहने वाले ज्यादा तर लोग गरीब वर्ग से हैं, जो मजदूरी के तहत रोज़ कुआं खोदकर पानी पीते है। कोरोना वायरस महामारी की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया गया था, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण का सबसे ज्यादा प्रभाव धारावी इलाके में हुआ था, एक समय ऐसा था,जब धारावी को कोरोना वायरस का हॉट स्पॉट कहा जाता था, यही वजह है की हजारो स्थानीय निवासी और मजदूर धारावी इलाका छोड़ अपने वतन के लिए रवाना हो गए थे, क्योंकि धारावी में पूरी तरह ताला लग चुका था और लॉकडाउन की वजह से सभी कंपनियां और कारखाने बंद हो गए थे।


बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अनुसार धारावी में 5,000 गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) रजिस्टर्ड कंपनी और कारखाने है और जबकि लगभग 1,500 बिना रजिस्टर के कारखाने और छोटी-मोटी कंपनी चलती है। धारावी को अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट के लिए माना जाता है। ऐसे तो सरकारी आंकड़ों के हिसाब से धारावी की आबादी 6.53 लाख है, लेकिन जनसंख्या को देखते हुए 8.5 लाख से अधिक होने का अनुमान है। धारावी की अर्थव्यवस्था लॉकडाउन में टूट गई है और लॉकडाउन के बाद लगभग 60% से अधिक व्यवसाय बंद हो गए है, बहुत से लोगों के घरों में काम करते है, जैसे गारमेंट की शर्ट में बटन लगाना हो या जरी का काम हो,कैटरिंग में काम करते है,सड़को पर सब्ज़ी,फल और मछली बेचते है आदि लेकिन फुटपाथ बंद है जिसकी वजह से वोह भी बहुत परेशान हाल है।

लॉकडाउन के दौरान जो मजदूर अपने घर नहीं लौट सके वह घरो में मास्क बनाने लगे थे, कोविड अस्पतालों में हाउसकीपिंग स्टाफ या सुरक्षा कर्मियों के रूप में काम करने लगे थे लेकिन अब धीरे-धीरे वह भी बेरोज़गार हो रहे है। लॉकडाउन के समय जो मजदूर काम बंद होने की वजह से घर लौट चुके थे अब वह शहर वापस आ रहे हैं और धारावी को अपने इन मजदूरों के लिए रोज़गार तलाश करना है मगर इस बिगड़ती अर्थव्यवस्था में बहुत मुश्किल है।

Updated : 8 Sep 2020 1:29 PM GMT
Tags:    
Next Story
Share it
Top