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वाह! क्या बहादुरी दिखाई है, काश! मुंबई पुलिस इन्हें पकड़ती...

वाह! क्या बहादुरी दिखाई है, काश! मुंबई पुलिस इन्हें पकड़ती...
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मुंबई। मुंबई पुलिस ने टीआरपी घोटाला उजागर किया है। रिपब्लिक चैनल के प्रमोटरों पर मुंबई पुलिस का आरोप है कि वे टीआरपी स्कैम में शामिल हैं। इस पर मैक्स महाराष्ट्र के संपादक रविंद्र आंबेकर ने मुंबई पुलिस सवाल दागते हुए कहा कि आपने इतनी ताकत और संसाधन लगा दिए इस मामले के लिए, क्योंकि रिपब्लिक टीवी ने आपके कॉलर को हाथ डाला, तो आपने रिपब्लिक को धमकाने के लिए एड़ी चोटी का दम लगा दिया। अगर आपको असल में कारवाई करनी है, तो उन कॉर्पोरेट हाउसेस के खिलाफ करो जो ये एजेंडा चलाते हैं, जो किसी एक पक्ष के लिए काम करते हैं। एक ही पार्टी की आवाज बुलंद हो, विपक्ष को कमजोर दिखाया जाए, इसलिए विशिष्ट चैनलों को फायनेंस करते हैं।

मुझे पुरा भरोसा है, मुंबई पुलिस कभी ऐसा नहीं कर पाएगी। जैसे-जैसे मामला आगे बढेगा। वैसे-वैसे मामला ढीला पडता चला जाएगा। मुंबई पुलिस में हिम्मत होती, तो वो दो छोटे चैनलों के मालिकों को गिरफ्तार करके दहशत ना बनाते। उनमें अगर हिम्मत होती तो पहले सबसे बडे चैनल पर हाथ डालते। रिपब्लिक के मालिक, संपादक को अंदर करते, जो विज्ञापन दे रहे हैं उन्हे अंदर डालते। इनको सिर्फ अर्णब गोस्वामी को धमकाना है..! आप असली हिम्मत दिखाओ.. ! टीआरपी स्कैम में कॉर्पोरेट कंपनियों को पहले गिरफ्त में लो। फिर साबित होगी आपकी बहादुरी!

क्या है TRP?

गौरतलब है कि टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट (TRP) से यह पता लगाया जाता है कि किस चैनल के किस प्रोग्राम को कितने दर्शक देखते हैं। टीआरपी का पता लगाने के लिए चुनिंदा घरों में एक डिवाइस पीपल्स मीटर लगाया जाता है। पीपल्स मीटर उस घर के टीवी से जुड़ा होता है। पीपल्स मीटर के जरिये यह रिकॉर्ड किया जाता है कि कौन-सा प्रोग्राम या चैनल उससे कनेक्टेड टीवी पर कितनी बार और कितनी देर देखा जा रहा है। पीपल्स मीटर के द्वारा रिकॉर्ड डेटा का विश्लेषण करने के बाद तय होता है कि किस चैनल या किस प्रोग्राम की टीआरपी कितनी है। किन घरों में पीपल्स मीटर लगाया गया है, यह गोपनीय रखा जाता है।

Updated : 8 Oct 2020 2:22 PM GMT
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