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मोदी-ठाकरे मुलाकात के क्या हैं मायने?

मोदी-ठाकरे मुलाकात के क्या हैं मायने?
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मुंबई : मुंबई: महाराष्ट्र में भी राजनीतिक हलचल तेज है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को उप मुख्यमंत्री अजित पवार और कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की थी।

इस दौरान CM ने सुप्रीम कोर्ट के मराठा आरक्षण कोटे पर रोक लगाने के फ़ैसले पर बात की। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र से जुड़े कई मुद्दों पर भी चर्चा की। ठाकरे ने मीडिया को जानकारी दी कि उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने 12 मांगें रखी हैं।

कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ठाकरे ने प्रधानमंत्री से अकेले मुलाकात करने के लिए 10 मिनट मांगे थे, जिसे PM ने मान भी लिया था। जिसके बाद दोनों ने अलग से भी मुलाकात की थी।

मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ठाकरे ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "हम अब शायद राजनीतिक रूप से साथ नहीं हैं लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि हमारे संबंध टूट चुके हैं। मैं कोई नवाज़ शरीफ़ से मिलने नहीं गया था। अगर मैं देश के प्रधानमंत्री से अलग से व्यक्तिगत तौर पर मिला हूं तो इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है।"

क्या हैं मोदी और उद्धव ठाकरे की मुलाक़ात के मायने

उद्धव ने कहा, "प्रधानमंत्री ने हमारी चर्चा के सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया है। केंद्र के पास जो भी लंबित मुद्दें हैं, उन पर उनके द्वारा सकारात्मक फैसला लेने की उम्मीद है। मैं प्रधानमंत्री जी को शुक्रिया अदा करता हूं। इस बैठक का कोई राजनीतिक मनसूबा नहीं था। मैं और मेरे सहयोगी मुलाकात से संतुष्ट हैं।"

उद्धव ठाकरे और नरेंद्र मोदी की इस मुलाक़ात के तीन बड़े राजनीतिक अर्थ हैं।

मराठा आरक्षण का मामला

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने पाँच मई को मराठा आरक्षण को खत्म कर दिया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि संविधान के 102वें संशोधन के बाद राज्यों को इस तरह के आरक्षण देने का कोई अधिकार नहीं है।

तब से महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार लगातार कह रही है कि केंद्र सरकार आरक्षण दे सकती है। इन सब के बीच, केंद्र सरकार ने 13 मई को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करते हुए कहा कि 102वें संशोधन के अनुसार राज्यों को अपने हिसाब से आरक्षण देने का अधिकार है।

ओबीसी और अनुसूचित जाति के आरक्षण का मामला

सभी राज्यों में ओबीसी समुदाय को पंचायती राज चुनाव में आरक्षण दिया जाता था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी रोक लगा दी थी। इस मामले पर राज्य सरकार का कहना है कि इसके कारण से ग्राम पंचायतों और नगर निकायों की 56,000 सीटों पर असर पड़ेगा।

कोर्ट का मामले में तर्क ये था कि ओबीसी समुदाय को राजनीतिक आरक्षण देने से पहले जनसंख्या के आँकड़ों की मालूमात होने की ज़रूरत थी।

'मोदी-ठाकरे संबंध कभी नहीं टूटने वाले'

उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने जो 12 माँगें रखीं उनमें से 11 मुद्दे सीधे तौर पर जनता से जुड़े हुए थे लेकिन 12वां मुद्दा सीधे सत्तारुढ़ महाविकास गठबंधन से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा ठाकरे ने विधान परिषद में 12 सदस्यों को राज्यपाल की ओर से नामित ना किए जाने का मुद्दा भी उठाया। साथ ही उन्होंने मांग की है कि मोदी इसे लेकर राज्यपाल को निर्देश दें।

Updated : 10 Jun 2021 6:29 AM GMT
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