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हम दो हमारे दो,नियम का हम सभी अगर कर रहे पालन तो कानून बनाने में क्या दिक्कत है?

हम दो हमारे दो,नियम का हम सभी अगर कर रहे पालन तो कानून बनाने में क्या दिक्कत है?
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नई दिल्ली। जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने और 2 बच्चों की नीति लागू करने की गुहार वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि अगर हम दो हमारे दो नियम का पालन mYकर रहे हैं तो कानून बनाने में क्या परेशानी है। केंद्र सरकार ने कहा है कि देश के लोगों को परिवार नियोजन के तहत दो बच्चों की संख्या सीमित रखने के लिए मजबूर करने के वह खिलाफ है क्योंकि इससे जनसंख्या के संदर्भ में विकृति उत्पन्न हो जाएगी। SC में याचिकाकर्ता ने स्वास्थ्य मंत्रालय के जवाब पर ऐतराज जताया और कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय इस मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया है बल्कि होम मिनिस्ट्री पक्षकार है और स्वास्थ्य मंत्रालय के पास इस बात का डाटा नहीं है कि आधार कार्ड के तहत कितने परिवार में कितने बच्चे हैं। ये डाटा होम मिनिस्ट्री के पास है। वोटर आईकार्ड आदि का लेखाजोखा भी होम मिनिस्ट्री के पास होता है।

तब स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कहा गया कि वह मामले में पक्षकार बनना चाहता है और इस मामले में वह भी पक्षकार हो सकता है क्योंकि ट्रांजक्शन ऑफ बिजनेस रूल के तहत इस मामले में वह पक्षकार है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इस बारे में डिटेल पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान याची ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने याचिका का विरोध किया है पर हम जानना चाहते हैं कि आखिर चीन जैसी कठोर और प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने में क्या परेशानी है। अगर कुछ लोग जानबूझकर जनसंख्या विस्फोट करने में लगे हैं तो जनसंख्या नियंत्रण कानून बनने से वो लोग भी हम दो हमारे दो नियम का पालन करने लगेंगे। सरकार आधार कार्ड, वोटर आईकार्ड और राशन कार्ड के आधार पर बताए कि पांच से ज्यादा बच्चे वाले कितने परिवार हैं। साथ ही कितने लोगों के एक से दो बच्चे हैं। कितने के 3 से 6 बच्चे हैं कितने के 7 से 10 बच्चे हैं।

suprime court में BJP नेता अश्विनी उपाध्याय की ओर से अर्जी दाखिल कर भारत सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है और कहा कि जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए कदम उठाए जाएं। देश में बढ़ती जनसंख्या के कारण ही क्राइम बढ़ रहा है और नौकरियों की कमी हो रही है। जनसंख्या कंट्रोल करने के लिए जस्टिस वेंकटचेलैया कमिशन ने जो सिफारिस की थी उस पर अमल किया जाना चाहिए। नैशनल कमिशन टू रिव्यू द वर्किंग ऑफ कंस्टिट्यूशन बनाया गया था कमिटी के चीफ जस्टिस वेंकटचेलैया ने दो साल की बहस के बाद सिफारिश की थी कि संविधान के अनुच्छेद-47 ए में बदलाव किया जाए और उसमें जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाया जाए। दो बच्चों की पॉलिसी घोषित किया जाए। यानी सरकारी नौकरी, सब्सिडी आदि की क्राइटेरिया तय की जाए। इस पॉलिसी का उल्लंघन करने वालों के कानूनी अधिकार, वोटिंग अधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार ले लिए जाए।

Updated : 2021-02-23T13:38:21+05:30
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