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Mumbai करों की वसूली पर आप का विरोध,भाजपा-शिवसेना दोनों ने मुंबईकरों को ठगा

Mumbai करों की वसूली पर आप का विरोध,भाजपा-शिवसेना दोनों ने मुंबईकरों को ठगा
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मुंबई। छूट प्रदान करने के बाद 500 वर्ग फीट तक के घरों से फिर से पुरानी दरों पर पिछले वर्ष के करों की वसूली का आम आदमी पार्टी ने तीव्र विरोध किया है। यह मुंबई के लाखों मध्यवर्गीय परिवारों के साथ बहुत बड़ी धोखाधड़ी है। पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस संबंध में वादा किया था और शिवसेना ने भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में यह वादा किया था कि 500 वर्ग फीट तक के घरों को संपत्ति कर से मुक्त रखा जाएगा। इन घरों में आम आदमी रहता है, जिस पर कोविड-19 के कारण सबसे ज्यादा असर पड़ा है। नौकरी रोजगार पर बहुत बुरा असर पड़ा है और उसे आर्थिक कठिनाइयों का सामना सबसे ज्यादा करना पड़ रहा है । मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आम आदमी को किसी भी क्षेत्र में राहत प्रदान करने में कोई रुचि नहीं दिखाई है, चाहे वह बिजली के बढ़े हुए बिलों का मामला हो या स्कूल फीस में राहत का मुद्दा हो।

मनपा आयुक्त इकबाल चहल द्वारा तथाकथित बकाया राशि की वसूली की घोषणा आम जनता के साथ क्रूर मजाक है। आम आदमी पार्टी की नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रीति शर्मा मेनन ने कहा "2019 में जोर शोर से यह घोषणा की गई थी कि छोटे घरों को कर मुक्त कर दिया गया है। मुंबई मनपा सहित पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी बार-बार इस बात की घोषणा की थी, जिसे मीडिया ने प्रमुखता से प्रसारित किया था। अब मनपा आयुक्त कह रहे हैं कि यह एक भूल थी। अगर यह भूल थी तो इसका भुगतान उसे करना चाहिए जिसने यह गलती की, न कि मुंबई के आम नागरिकों को। धोखाधड़ी का यह जाल 2019 के अध्यादेश क्रमांक 11 में बुना गया है , जिसमें यह कहा गया है कि छोटे घरों पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाएगा । लेकिन ठीक अगले पैराग्राफ में इस बात को झुठलाते हुए यह लिखा गया है कि करों में यह छूट केवल जनरल टैक्स पर होगी। सबको पता है कि जनरल टैक्स पूरे संपत्ति कर का एक छोटा सा हिस्सा है। मुंबई के आम नागरिकों के खिलाफ रचे गए इस फ्रॉड में क्या महाराष्ट्र राज्य के राज्यपाल भी हिस्सा रहे हैं?"

"कॉर्पोरेट सीएसआर और निजी एनजीओ से व्यापक समर्थन के बावजूद, मुंबई मनपा प्रशासन महामारी के दौरान अपनी वित्तीय व्यवस्था को संभाल नहीं पाया। अब अपनी गलती के लिए यह मध्यम वर्ग पर बोझ डाल रहा है, जो शहर की रीढ़ है और पहले से ही महामारी के कारण आर्थिक तबाही झेल रहा है। मनपा के चुने हुए प्रतिनिधि और अधिकारी , कॉर्पोरेट्स और होटल उद्योग के लिए संपत्ति कर माफ करने के लिए एकदम से तैयार हो जाते हैं। स्पष्ट रूप से श्री उद्धव ठाकरे की सरकार, अपने पूर्ववर्ती फडणवीस की तरह, केवल कॉर्पोरेट्स समर्थक और आम लोगों के खिलाफ है।""कोविड लॉकडाउन पूरी तरह से अनियोजित था और इसने गैर पारंपरिक क्षेत्र के आर्थिक तंत्र को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। महामारी के साथ-साथ हम आर्थिक मंदी के बीच में हैं, जिसने ग़ैर पारंपरिक क्षेत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

लोगों के वेतन पर असर पड़ा और लोगों को आर्थिक मोर्चे पर संघर्ष करना पड़ रहा है। बेरोजगारी की दर बढ़ी है और लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है। ऐसी स्थिति में, यह उम्मीद थी कि मनपा प्रशासन संवेदनशील होकर मुंबईकरों की समस्या को ध्यान में रखेगा। पर दुख की बात है कि हुआ इसके विपरीत। यह कितनी हास्यास्पद बात है जब मनपा प्रशासन कहता है कि पिछले साल की टैक्स माफी एक 'गलती' थी ? मनपा का कामकाज कैसे चलता है , यह क्या तरीका है ?"आम आदमी पार्टी की मांग है कि 500 वर्ग फीट से कम के घरों के टैक्स पिछले साल सहित इस वर्ष भी पूरी तरह से माफ किए जाएं। यदि इसमें वैधानिक अड़चनें हैं, तो राज्य सरकार को उसमें संशोधन करना चाहिए और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अपना वादा पूरा करना चाहिए।

Updated : 5 Jan 2021 11:54 AM GMT
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