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इसे समझो ना रेशम का तार भइया, मेरे राखी का मतलब है प्यार...

इसे समझो ना रेशम का तार भइया, मेरे राखी का मतलब है प्यार...
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सुभाष गिरी

मुंबई। भाई-बहन का राखी का त्‍योहार इस बार कोरोना काल में आ रहा है। इस बार बाजारों में चहल-पहल तो नज़र नहीं आएगी, लेकिन घरों में भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक यह पर्व पारंपरिक उत्‍साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा। राखी 3 अगस्‍त, सोमवार को है। इस बार राखी पर दुर्लभ एवं शुभ संयोगों की श्रृंखला भी बन रही है जो कि लाभदाय‍क साबित होगी। रक्षाबंधन पर सोमवार व पूर्णिमा के कारण इस वर्ष आनंद योग, सवार्थ सिद्धि योग एवं श्रावण नक्षत्र एक साथ पड़ रहे हैं। यह शुभ संयोग करीब तीन दशक बाद सामने आ रहा है। रक्षाबंधन के फिल्मी गाने भी खूब बजते हैं।

क्या कहा ज्योतिषाचार्य पं. पीआर रवि ने

इस बार 3 अगस्‍त को रक्षाबंधन पर भद्रायोग सुबह 9.30 बजे समाप्‍त हो रहा है। इससे इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। भद्रा समाप्ति के बाद ही राखी बंधवाना शुभ रहता है। श्रावणी उपाकर्म भी इसी दिन किए जाएंगे। मौजूदा वर्ष में प्रात: 9.30 बजे से शाम तक राखी बंधवाने के कई मुहूर्त रहेंगे। ज्योतिषाचार्य पं. पीआर रवि ने बताया कि वैसे मुख्‍य रूप से वृश्चिक, कुंभ व सिंह लग्‍न में राखी बंधवाना सबसे शुभ माना जाता है। सुबह 6 बजकर 37 मिनट के बाद 28 योगों में सर्वश्रेष्ठ आयुष्मान योग इस समय विद्यमान रहेगा।

सुबह 7 बजकर 18 मिनट के बाद पश्चात श्रवण नक्षत्र आ जाएगा, जो सिद्धि योग का निर्माण करेगा। सुबह 9 बजकर 28 मिनट पर भद्रा भी समाप्त हो जाएगी। इन शुभ योग में रक्षाबंधन का पर्व भाई और बहनों की दीर्घायु, समृद्धि,सुख, सौभाग्य से परिपूर्ण रहेगा।
यह है समय
सुबह - 9.30 बजे से 10.30 बजे तक
दोपहर - 1.30 बजे से शाम 7.30 बजे तक
शाम - 7.30 बजे से रात 10.30 बजे तक
रात 10.30 बजे से रात 12.00 बजे तक


यह है रक्षाबंधन की पूजा विधि
रक्षाबंधन के पवित्र पर्व के दिन आप सुबह स्नान आदि से निवृत हो जाएं। इसे बाद आरती एवं पूजा की थाली सजाएं जिसमें राखी के साथ रोली, चंदन, अक्षत, मिष्ठान और पुष्प रखें। इस थाली में घी का एक दीपक भी जलाएं। इस थाल को अब आप अपने पूजा स्थान पर रख दें। सभी देवी देवातओं का स्मरण करें। धूप जलाएं और पूजा करें। फिर भगवान का आर्शीवाद लें। भाई की आरती कर उसकी कलाई में राखी बांधें।
राखी के तिलक पर चावल क्यों चिपकाया जाता है…
शास्त्रों के अनुसार, चावल को हविष्य यानी हवन में देवताओं को चढ़ाया जाने वाला शुद्ध अन्न माना जाता है। कच्चे चावल का तिलक में प्रयोग सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला होता है। चावल से हमारे आसपास की नकारात्मक ऊर्जा सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। भाई-बहन का पवित्र पर्व रक्षा बंधन मंगलमयी हो और इस पर्व को मनाते समय कोई भूल-चूक न हो, इसके लिए हमें कुछ पारंपरिक बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Updated : 29 July 2020 2:48 PM GMT
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