बीआरएस बीजेपी की 'बी' टीम, महाराष्ट्र में कोई असर नहीं; तेलंगाना पैटर्न से लोगों को फंसाने की कोशिश, हम जल्द ही पोल खोल करेंगे:- नाना पटोले

​पंढरपुर की वारी भक्ति और आस्था का विषय है; केसीआर को इसका राजनीतिक फायदा नहीं उठाना चाहिए। बीजेपी को पहले देश में 9 साल से लगे अघोषित आपातकाल के बारे में बात करनी चाहिए. शिंदे-फडणवीस सरकार की नाकामी के कारण मुंबई पानी में डूबा, नालों की सफाई के करोड़ों रुपए कहां गए?

Update: 2023-06-26 15:52 GMT

स्पेशल डेस्क मैक्स महाराष्ट्र /मुंबई- तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति ( बीआरएस) बीजेपी की बी टीम है और इसका महाराष्ट्र की राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। राज्य की जनता जानती है कि वोटों के बंटवारे से किसे फायदा होता है। तेलंगाना में बीआरएस पार्टी के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। उसके कई नेता कांग्रेस पार्टी में शामिल हो रहे हैं। तेलंगाना पैटर्न भी गुजरात पैटर्न की तरह लोगों को फंसाने की एक चाल है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नाना पटोले ने चेतावनी देते हुए कहा है कि केसीआर की पार्टी ने तेलंगाना में क्या किया है, इसकी सारी जानकारी कांग्रेस के पास है। उन्होंने कहा कि हम जल्द की तेलंगाना पैटर्न की पोल खोल करेंगे।

सोमवार को तिलक भवन में पत्रकारों से बात करते हुए नाना पटोले ने कहा कि तेलंगाना से भारत राष्ट्र समिति महाराष्ट्र की राजनीति में घुसने की कोशिश कर रही है, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं होगा। वारकरी और जनता को उम्मीद है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार आएगी और कांग्रेस के नेतृत्व में ही महाराष्ट्र में सरकार बनेगी।  केसीआर ने 9 साल में तेलंगाना में कोई काम नहीं किया है।उन्होंने दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों के लिए कुछ भी ठोस  फैसले नहीं लिए हैं । अभी भी तेलंगाना में प्याज ज्यादा महंगा बताया जा रहा था। वहीं यह बात भी सामने आई है कि महाराष्ट्र के किसानों ने जब तेलंगाना में प्याज बेचा तो उनके साथ धोखा हुआ।  केसीआर सरकार सिर्फ बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर काम करने का ढिंढोरा पीट रही है। जबकि सच्चाई यह है कि जो लोग  काम करते हैं उन्हें विज्ञापन देने की जरूरत महसूस नहीं होती है। पंढरपुर में आषाढ़ी वारी हो रही है। ऐसी रिपोर्ट है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर  हैदराबाद से 600 कारों का बेड़ा लेकर वहां पहुंचे हैं।  पंढरपुर में आषाढ़ी वारी पर 10 लाख वारकरी जुटते हैं। ऐसे में क्या यह सही है कि केसीआर बाहर से और लोगों को लाकर वहां भीड़ जुटा रहे हैं ? पंढरपुर का विठोबा आस्था और श्रद्धा का विषय है। कोई इसका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करे तो यह ठीक नहीं है।

बीजेपी को आपातकाल के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा को इस बात का गहन अध्ययन करना चाहिए कि दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने किन परिस्थितियों में आपातकाल लगाया था। इस बात पर वह क्या कहेंगे कि बीजेपी का कोई इतिहास नहीं है? 1975 में अमेरिका-वियतनाम युद्ध शुरू हुआ और उसी समय कुछ लोग देश में लोकतंत्र खत्म करने की साजिश कर रहे थे। कुछ लोग जानबूझकर माहौल को भड़का रहे थे। अगर इंदिरा जी ने आपातकाल नहीं लगाया होता तो देश में लोकतंत्र नहीं बचता। 18 महीने के बाद, इंदिरा जी ने आपातकाल हटा लिया और चुनाव कराएं। उनके प्रयासों से देश में लोकतंत्र की रक्षा हुई । बाद में कांग्रेस पार्टी ने आपातकाल के लिए माफ़ी भी मांग ली थी । लेकिन अब देश में क्या हो रहा है? आपातकाल से भी अधिक विकट परिस्थितियां हैं। लोकतंत्र और संविधान पर सत्ता को  काबिज किया जा रहा है। नाना पटोले ने कहा कि  बीजेपी को पहले देश में 9 साल से लगे अघोषित आपातकाल के बारे में बात करनी चाहिए। मोदी सरकार के खिलाफ बोलने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। सरकारी जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। विपक्ष को दबाया जा रहा है। जो सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं उन्हें परेशान किया जा रहा है। आपातकाल के नाम पर बीजेपी युवाओं को भड़काने का काम कर रही है। इस  तुरंत बंद किया जाना चाहिए।नाना पटोले ने कहा कि आज देश के हालात को देखते हुए बीजेपी को आपातकाल पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।

 पहली बारिश में मुंबई में डूबी कहां गए करोड़ों रुपए ?

राज्य में शिंदे-फडणनीस सरकार घोषणा और प्रचार वाली सरकार है। वे कुछ नहीं करते हैं , लेकिन अपनी बातों को बढ़ा – चढ़ा कर पेश करते हैं। पहली ही बारिश ने इस सरकार के दावों की पोल खोल दी है। मुंबई में कई जगहों पर पानी जमा होने से मुंबईकरों को काफी परेशानी हुई। 6 मुंबईकरों को अपनी जान गंवानी पड़ी। मुंबई में जगह-जगह गड्ढे खोदे गए हैं। सरकार की तरफ से दावा किया गया कि नालों की सफाई समेत अन्य कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किये गए।  इसके बावजूद  मुंबई पानी में डूब गई।  बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये पैसा कहां गया? ये सवाल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने शिंदे – फडणवीस सरकार से पूछा है।

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